What is Speaker – कंप्यूटर स्पीकर क्या है इसकी पूरी जानकारी
What is Speaker – कंप्यूटर स्पीकर क्या है इसकी पूरी जानकारी
कंप्यूटर स्पीकर क्या है?
स्पीकर एक कंप्यूटर का आउटपुट डिवाइस है, जो बहुत से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में उपयोग किये जाते है जिसका उपयोग खाश कर कंप्यूटर के लिए किया जाता है, और यह एक तरह का सुनने वाली युक्ति है, इसे व्यक्तियों के दवरा सुना जाता है,
और इनमे से कुछ विशेष प्रकार के स्पीकर भी है, जो मुख्य रूप से कंप्यूटर के लिए बनाया गया है, परन्तु इसके अलावा जो भी स्पीकर होते है, वे किसी भी उपकरण में जोर कर सुने जाते है,
और जबकि जो कंप्यूटर के लिए बनाये गए स्पीकर होते है, उस स्पीकर से निकलने वाली ध्वनि के जो सिंगल होते है, वे sound card के द्वारा बनाया जाता है, जिसका काम होता है कंप्यूटर से ध्वनि को स्पीकर के माध्यम से निकलना,
1981 में IBM ने पहला इंटरनल कंप्यूटर को बनाया था, जो सुनाने में जयादा बेहतर नहीं था, लेकिन 1876 में ही एलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीफ़ोन के द्वारा स्पीकर का निर्माण कर लिया था, तभी एक जगह से दूसरे जगह बात हो जाती थी।
स्पीकर कैसे काम करते हैं?
स्पीकर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक के तरंगो को ध्वनि तरंगो में बदल कर काम करता रहता है, और कंप्यूटर के द्वारा जो ऑडियो रेसबर होता है उसके द्वारा इनपुट करता है, जो बहुत अच्छे से काम करता है।
स्पीकर को हिंदी में वक्त कहा जाता है।
What is Speaker In Hindi
इनपुट दो तरह के होते है:-
- अनुरूप (Analog ):- इस तरह के इनपुट एनालॉग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगो को ध्वनि तरंगो में आसानी से बदल देते है।
- डिजिटल (Digital) :- परन्तु डिजिटल स्पीकर एक डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में बदल देता है, उसके बाद एनालॉग ध्वनि तरंगे निकलने लगती है।
ध्वनि को फ्रीक्वेंसी (Frequency) के द्वारा मापा जाता है, जब ध्वनि में उतर चढ़ाव होता है तो Frequency के द्वारा ही मापा जाता है।
कंप्यूटर स्पीकर
पहले के जो कंप्यूटर होते थे उनमे जो स्पीकर का इस्तमाल होता था, वो छोटे होते थे जिसको मदरबोर्ड के साथ जोड़ा जाता था उसके बाद उसका इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन बाद में इनमें sound card को जोर कर इसका इस्तेमाल करने लगे, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से अपने हैडफ़ोन को प्लग के अंदर डाल कर सुन सकते थे।
पहले के समय में स्पीकर जयादा शक्तिशाली नहीं होता था। लेकिन केवल 8 बिट या 16 बिट का ध्वनि ही काम करता था, अभी के नए जनरेशन के कंप्यूटर स्पीकर में आमतौर पर 2.1 (2 लाउडस्पीकर और एक सबवूफर) के स्टाइल के तौर पर होते है, जो की उत्तम होते है, एक आकस्मिक सुनाने वाले के लिए है।
एक गेमिंग उत्साही के लिए, 5.1 या भी अधिक विस्तृत 7.1 सराउंड सिस्टम उपलब्ध हैं। ये मूल रूप से प्लग एंड प्ले सिस्टम हैं, जो सबवूफर से कंप्यूटर तक एक यूएसबी प्लग है, और दूसरा सैटेलाइट स्पीकर को प्लग के अंदर जोड़े रखता हैं।
स्पीकर के प्रकार
विशिष्ट मामलों में स्पीकर को एक श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है, और यह अपने वेरिएबल के हिसाब से खुद में अद्वितीय हैं। यह एक तरह का तकनीकी है। इसलिए इस तकनीकी को शब्दों में स्पीकर नाम दिया गया है, और इस तरह स्पीकर की कुछ श्रेणियां हैं।
- Dynamic
- Electrostatic
- Subwoofer
- Horn
- Planar-magnetic
इन सभी का एक अपना खासियत है, तो इनके बारे में अब आगे विस्तार से जानते है :-
Dynamic (गतिशील):- ये सामान्य प्रकार के होते हैं, और ये आमतौर पर निष्क्रिय स्पीकर होते हैं। इनमे कम आवृत्ति ध्वनि उत्पन करने के लिए जाने जाते हैं तथा इसमें एक या उससे ज्यादा ट्वीटर ड्राइवर भी होते है, कुछ cases में तो, professional स्पीकर में रियर ड्राइवर भी होते हैं जिससे की ध्वनि को amplify बी किया जा सके।
Electrostatic (इलेक्ट्रोस्टैटिक):- इलेक्ट्रोस्टैटिक स्पीकर्स लोगों के लिए बहुत ही अच्छी पसंद है जो की क्रिस्प और विस्तृत ध्वनि पसंद करते है। और ये डायफ्राम स्पीकर में हैं इलेक्ट्रोस्टैटिक स्पीकर्स लोगों के लिए बहुत ही अच्छी पसंद है जो की क्रिस्प और विस्तृत ध्वनि पसदं। ये डायफ्राम स्पीकर में एक ड्राइव और एक महीन झिल्ली का स्थान होता है।बाहरी शक्ति के स्रोत से हमेशा जुड़ा रहता है। इस प्रकार के मामलों में, इलेक्ट्रोस्टैटिक स्पीकर को सबसे अधिक उच्च आवृत्तियों को इस्तमाल किया जाता है और ये निम्न-आवृत्ति वाले स्पीकर आदर्श होते हैं।
Subwoofer (सबवूफर):- यह टाइप में बड़े वूफर ड्राइवर है, जो कि एक बास पोर्ट है जो कम आवृत्ति वाली ध्वनि है। इस्टमाल बेस को बढ़ाने के लिए दुसरे के साथ आने वाले स्पीकर से वो भी ध्वनि की गुणवत्ता से समझौता कर सकते हैं।
Horn (सींग):- इन स्पीकर्स और वेव वेव गाइड स्ट्रक्चर में ड्राइवर्स की व्यवस्था भी शामिल है। इन हॉर्न स्पीकर के इस्तमाल से उपयोगकर्ताओं को लाभ का फ़ायदा बढ़ रहा है अपेक्षाकृत उच्च डिग्री की संवेदनशीलता और ध्वनि के प्रसारण में बहुत ही सहायता होता है।
Planar-magnetic (प्लानर-चुंबकीय):- इन स्पीकर्स में डायफ्राम के स्थान में, प्लेनर-मैग्नेटिक स्पीकर्स फीचर होते हैं। एक लाइट मेटल रिबन, और इलेक्ट्रोस्टैटिक के संबंध में कोई भी शक्ति स्रोत होने के लिए काम करता है। ये जितने भी स्पीकर हैं वे इतने विस्तृत हैं।













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